अकबर के राज्यकाल के पूर्व हिन्दू -मुस्लिम स्थापत्य कला का संभवतः सबसे सुंदर नमूना शेरशाह का मक़बरा है। इसे स्वयं शेरशाह ने सहसराम बिहार में झील के बीच कुर्सी देकर बनवाया था। इसकी डिजाइन मुस्लिम है,लेकिन इसके भीतरी भाग में हिन्दू ब्रैकेट और पटाई के तीरो के ऊपरी भागो (horzontal architraves) का सुन्दर प्रयोग किया गया है। किसी आलोचक ने ठीक कहा है ,"तुगलक काल की इमारतो के गाम्भीर्य और शाहजहाँ की महान कृति ताजमहल के स्त्रियोचित सौन्दर्य के बीच जैसे संपर्क स्थापित करता है। "
इतनी खूबसूरत कला का हस्र देखकर दिल टूट गया। चारो तरफ़ गंदगी का जैसे अंबार लगा है। झील में इतनी काई जमी है कि पानी काला -मटमैला दिखता है। यद्यपि यह भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन है जिस पर सम्भवतः लाखो रूपये सलाना इसकी देखरेख के लिए आता होगा।
दुःख के साथ कहना पड़ता है कि हम अपनी विरासत को बचाने में असमर्थ है ………………।
























