शुक्रवार, 24 सितंबर 2021

साहिर

 Qalame Sahir Ghalib ke naam


यह नज़्म 1968 में लिखी गई


इक्कीस बरस गुज़रे आज़ादी-ए-कामिल को,

तब जाके कहीं हम को ग़ालिब का ख़्याल आया ।

तुर्बत है कहाँ उसकी, मसकन था कहाँ उसका,

अब अपने सुख़न परवर ज़हनों में सवाल आया ।


सौ साल से जो तुर्बत चादर को तरसती थी,

अब उस पे अक़ीदत के फूलों की नुमाइश है ।

उर्दू के ताल्लुक से कुछ भेद नहीं खुलता,

यह जश्न, यह हंगामा, ख़िदमत है कि साज़िश है ।


जिन शहरों में गुज़री थी, ग़ालिब की नवा बरसों,

उन शहरों में अब उर्दू बे नाम-ओ-निशां ठहरी ।

आज़ादी-ए-कामिल का ऎलान हुआ जिस दिन,

मातूब जुबां ठहरी, गद्दार जुबां ठहरी ।


जिस अहद-ए-सियासत ने यह ज़िन्दा जुबां कुचली,

उस अहद-ए-सियासत को मरहूमों का ग़म क्यों है ।

ग़ालिब जिसे कहते हैं उर्दू ही का शायर था,

उर्दू पे सितम ढा कर ग़ालिब पे करम क्यों है ।


ये जश्न ये हंगामे, दिलचस्प खिलौने हैं,

कुछ लोगों की कोशिश है, कुछ लोग बहल जाएँ ।

जो वादा-ए-फ़रदा, पर अब टल नहीं सकते हैं,

मुमकिन है कि कुछ अर्सा, इस जश्न पर टल जाएँ ।


यह जश्न मुबारक हो, पर यह भी सदाकत है,

हम लोग हक़ीकत के अहसास से आरी हैं ।

गांधी हो कि ग़ालिब हो, इन्साफ़ की नज़रों में,

हम दोनों के क़ातिल हैं, दोनों के पुजारी हैं ।

                                                 साहिर

शुक्रवार, 17 सितंबर 2021

अल्लाह की बेटियां

 

630 ईस्वी से पहले ये तीनो अरब देशों में पूजनीय थी। इन्हें अल्लाह की बेटियां कहा जाता था।

अल लात

मिनात

और उज़्ज़ा

बुधवार, 8 सितंबर 2021

ब्राह्मणों का ऐतिहासिक उल्लेख

 कहाँ लिखा हुआ है कि ब्राह्मण विदेशी है ?


जानना चाहते हो तो

पढिए निम्नलिखित पुस्तकें:-


1) मनुस्मृति

  श्लोक नं.२४


2) बाल गंगाधर तिलक द्वारा लिखित

वैदिक आर्या का मूलस्थान (Arctic home in the Vedas)


३) मोहनदास करमचंद गांधी द्वारा दि.२७ दिसंबर १९२४ का काँग्रेस अधिवेशन मे दिया हुआ अध्यक्षीय भाषण।


४) पंडित जवाहर लाल नेहरु का 

"पिता की ओर से पुत्री के नाम खत"


५) लाला लजतपराय द्वारा लिखित

 भारत वर्ष का इतिहास पृष्ठ २१-२२


६) बाल गंगाधर तिलक द्वारा लिखित

 भारत वर्ष का इतिहास   पृष्ठ ६३  ओर ८७


७) पंडित श्यामबिहारी मिश्रा और सुखदेव बिहारी मिश्रा द्वारा लिखित भारत वर्ष का इतिहास,भाग १ पृष्ठ ६२ ओर ६३


८) पं.जनार्दन भट्ट एम.ए द्वारा लिखित

 -माधुरी मासिक - भारतीय पुरातत्व की नयी खोज १९२५ - पृष्ठ २७ ओर २९


९) पंडित गंगाप्रसाद द्वारा लिखित

जाति भेदी  पृष्ठ १० और २७


१०) रविँद्र दर्शन - सुख सनपात्री भंडारी पृष्ठ २१ ओर २२


११) भारतीय लिपीतत्व - नागेँद्रनाथ बसू. पृष्ठ ४७ ओर ५१


१२) प्राचीन भारत वर्ष की सभ्यता का इतिहास - रमेश चंद्र दत्त, भाग -१ पृष्ठ १७ ओर २९


१३) हिँदी भाषा की उत्पति - आचार्य महावीर द्विवेदी


१४) हिंदी भाषेचा विकास - बाबू श्यामसुंदर पृ. ३ ओर ७


१५) हिँदुत्व - पं.लक्ष्मीनारायण गर्दे, पृष्ठ - ८,९ ओर २९


१६) आर्योँ का आदिम निवास -पं.जगन्नाथ पांचोली.


१७) महाभारत मीमांसा - राय बहादूर चिंतामणी विनायक वैद्य.


१८) जाति शिक्षा - स्वामी सत्यदेव परिभ्राजक,पृष्ठ ८ ओर ९


१९) २९ वा अखिल भारतीय हिंदू महासमेलन रामानंद चटर्जी, मॉडर्न रिव्ह्यू का भाषण


२०) २९ नवंबर १९२६ के दिन आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय का आज या नियतकालिन लेख। 


२१) देशभक्त सामाजिक का संपादकीय  लेख. पृष्ठ २९ फरवरी १९२४


२२) प्रेमा का वृंदावन मासिक - योगेशचंद्र पाल १९२७

पृष्ठ १३६ ओर १४३


२३) काका कालेलकर की *पिछडा वर्ग रिपोर्ट*


२४) धर्मशास्राचा इतिहास - पा.वा.काणे करना


 २५) हिंदू सभ्यता - राधाकृष्ण मुखर्जी, पृष्ठ ४१,४७ ओर ५९


२६) डी.डी.कोसंबी - प्राचीन भारत की संस्कृति और सभ्यता


२७) वोल्गा से गंगा - राहुल सांस्कृत्यायन


२८) ग्रीक ओरिजन्स ऑफ कोकणस्थ चित्पावन -प्रताप जोशी


२९) ना.गो.चाफेकर चित्पावन - पृष्ठ २९५


३०) वि.का.राजवाडे के मतानुसार ब्राम्हण विदेशी है। 


३१) स्वामी दयानंद सरस्वती -सत्यप्रकाश ग्रंथ


३२) टाईम्स ऑफ इंडिया का 2001 का DNA रिपोर्ट


३३) ऋग्वेद मे लिखा है की ब्राह्मण विदेशी है:-


34)आर्यां का मूळ वस्तीस्थान उत्तर ध्रुव.

-(आर्टीक्ट होम ईन द वेदाज)


35)हम ब्राह्मण लोग मध्य एशिया से भारत आये है  । 

(डिस्कव्हरी अॉफ इंडिया- पंडित जवाहरलाल नेहरु)


यह सब पढके (खासकर वेदों को) खुद ब्राह्मणों को भी समझ में आ जाएगा कि आर्यों का मूल निवास भारत में नही है।

फोर्ट विलियम कॉलेज

फोर्ट विलियम कॉलेज  ****** यह बड़ी मजेदार बात है कि सन् 1783 जॉन बी.गिलक्राइस्ट ईस्ट इंडिया कम्पनी में एक सहायक सर्जन के तौर पर नियुक्त ...