* मेरी कुछ और कविताए*
यात्रा के दौरान
हम दोनों दोस्त बने
साथ खाए-पिए
बोले-बतियाये
लेकिन
अयोध्या आते ही
मेरे हाथ में था के-सरिया
उसके जिस्म पे जख्म ग हरा .
यात्रा के दौरान
हम दोनों दोस्त बने
साथ खाए-पिए
बोले-बतियाये
लेकिन
अयोध्या आते ही
मेरे हाथ में था के-सरिया
उसके जिस्म पे जख्म ग हरा .
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें