क्या जातिप्रथा का उन्मूलन संभव है
हिन्दू समाज में जाति प्रथा की जड़ इतने गहरे तक समायी हुयी है कि इसे उन्मूलन करने की कोई सोच भी नहीं सकता और यदि कोंई ऐसा हिम्मत जुटाता भी है तो आगे चल कर धैर्य
खो देता है क्योकि हिन्दू सामाजिक प्रणाली इस मामले में इतनी कठोर है की से कोई गुन्जाईस नहीं बचती.
मै समझता हु कि हिन्दुओ में जातिप्रथा को निम्न प्रकार से ख़त्म करने की कोशश की जा सकती है-
1-अंतर्जातीय विवाह- यह एक ऐसा वास्तविक उपचार है जिस से काफी हद तक जातिप्रथा की कठोरता को कम किया जा सकता है.रक्त के एकीकरण से आपस में भाईचारा को बढ़ाया जा सकता है.
2-उन ग्रंथो को ख़ारिज करे जिनमे जातिप्रथा को मान्यता दी गयी है.
डॉ आंबेडकर कहते है की "जातिवाद मानने के लिए हिन्दू नहीं,उनका धर्म दोषी है ,जिसने जातिवाद के जहर को जन्म दिया है,यदि यह बात सही है तो आपको जातिवाद के अनुयायियों से न उलझकर हिन्दू शास्त्रों का विरोध करना चाहिए ."
3- हिन्दू अपनी सामाजिक व्यस्था को पवित्र तथा इश्वरीय मानते है अतः इस पवित्रता को ख़त्म करना आवश्यक है-
जब तक इस धारणा को ख़त्म नहीं किया जायेगा तब तक जाति नामक राक्षस को भी नहीं ख़त्म किया जा सकता.