रविवार, 27 मई 2012

kya jaatipratha ka unmulan sambhav hai


                                   क्या जातिप्रथा का उन्मूलन संभव है 
हिन्दू समाज में जाति प्रथा की जड़ इतने गहरे तक समायी हुयी है कि इसे उन्मूलन करने की कोई सोच भी नहीं सकता और यदि कोंई  ऐसा हिम्मत जुटाता भी है तो आगे चल कर धैर्य 
खो देता है क्योकि हिन्दू सामाजिक प्रणाली इस मामले में इतनी कठोर है की  से कोई गुन्जाईस नहीं बचती.
मै समझता हु कि हिन्दुओ में जातिप्रथा को निम्न प्रकार से ख़त्म करने की कोशश की जा सकती है-
1-अंतर्जातीय विवाह-   यह एक ऐसा वास्तविक उपचार है जिस से काफी हद तक जातिप्रथा की कठोरता को कम किया जा सकता है.रक्त के एकीकरण से आपस में भाईचारा को बढ़ाया जा सकता है.
2-उन ग्रंथो को ख़ारिज करे जिनमे जातिप्रथा को मान्यता दी गयी है.
डॉ आंबेडकर कहते है की  "जातिवाद मानने के लिए हिन्दू नहीं,उनका धर्म दोषी है ,जिसने जातिवाद के जहर को जन्म दिया है,यदि यह बात सही है तो आपको जातिवाद के अनुयायियों से न उलझकर  हिन्दू शास्त्रों का विरोध करना चाहिए ."
3- हिन्दू अपनी सामाजिक व्यस्था को पवित्र  तथा इश्वरीय मानते है अतः इस पवित्रता को ख़त्म करना आवश्यक है-
जब तक इस धारणा को ख़त्म नहीं किया जायेगा तब तक जाति नामक राक्षस को भी नहीं ख़त्म किया जा सकता.

मंगलवार, 22 मई 2012

                                                            रक्त पिपासु धर्म          
जब ब्राह्मणों ने मांस-मदिरा का सेवन आरम्भ कर दिया तो उन्हें पुरानो में पशुबली की वकालत करने में कोइ संकोच नहीं हुआ. एक पुराण का विशेष उल्लेख करना आवश्यक है.वह है काली पुराण.यह पुराण स्पष्ट रूप से देवी काली की पूजा को प्रचारित करने के लिए लिखा गया था .इस पुराण में एक अध्याय का नाम ही 'रुधिर अध्याय ' है।
इस अध्याय में शिव ने तीन पुत्रो बेताल,भैरव और भैरो को निम्न प्रकार से संवोधित किया है -
'मेरे पुत्रो !देवताओ का अनुग्रह प्राप्त करने के लिए सम्पादित होने वाले सस्कार और नियमो के विषय में, बताता हू -
      1-देवी ,मछली और कच्छप के चढाने से एक माह की अवधि के लिए खुश रहती है और मगरमच्छ से तीन, तक वन्य जन्तुओ की नौ प्रजातियों से देवी नौ महीने प्रसन्न रहती है ..........गौर,नीलगाय के रक्त से एक वर्ष और मृग तथा जंगली सूअर से बारह वर्ष तक संतुष्ट रहती है ........
मृग और दरियाई घोड़े के मांस से देवी पाच सौ वर्ष तक और रोहू मछली तथा बारहसिंघे से देवी तीन सौ वर्षो तक
संतुष्ट रहती है .
      डॉक्टर आंबेडकर ,संपूर्ण वाग्मय खंड 8 पृष्ट 126-127
दोस्तों ! हमारे प्राचीन ग्रंथो में बलि हत्या सूरा  पान का खुलकर वर्णन है . यही नहीं की किस जानवर की बलि से कितना अनुग्रह प्राप्त होता है बल्कि उस जानवर को किस तरह बलि दी जाय इसका भी वर्णन किया गया है -
बलि के लिए चंद्रहास सर्वोतम हथियार है,छुरे का दूसरा स्थान है जबकि कुदाली सबसे खराब साधन है.

फोर्ट विलियम कॉलेज

फोर्ट विलियम कॉलेज  ****** यह बड़ी मजेदार बात है कि सन् 1783 जॉन बी.गिलक्राइस्ट ईस्ट इंडिया कम्पनी में एक सहायक सर्जन के तौर पर नियुक्त ...