रक्त पिपासु धर्म
जब ब्राह्मणों ने मांस-मदिरा का सेवन आरम्भ कर दिया तो उन्हें पुरानो में पशुबली की वकालत करने में कोइ संकोच नहीं हुआ. एक पुराण का विशेष उल्लेख करना आवश्यक है.वह है काली पुराण.यह पुराण स्पष्ट रूप से देवी काली की पूजा को प्रचारित करने के लिए लिखा गया था .इस पुराण में एक अध्याय का नाम ही 'रुधिर अध्याय ' है।
इस अध्याय में शिव ने तीन पुत्रो बेताल,भैरव और भैरो को निम्न प्रकार से संवोधित किया है -
'मेरे पुत्रो !देवताओ का अनुग्रह प्राप्त करने के लिए सम्पादित होने वाले सस्कार और नियमो के विषय में, बताता हू -
1-देवी ,मछली और कच्छप के चढाने से एक माह की अवधि के लिए खुश रहती है और मगरमच्छ से तीन, तक वन्य जन्तुओ की नौ प्रजातियों से देवी नौ महीने प्रसन्न रहती है ..........गौर,नीलगाय के रक्त से एक वर्ष और मृग तथा जंगली सूअर से बारह वर्ष तक संतुष्ट रहती है ........
मृग और दरियाई घोड़े के मांस से देवी पाच सौ वर्ष तक और रोहू मछली तथा बारहसिंघे से देवी तीन सौ वर्षो तक
संतुष्ट रहती है .
डॉक्टर आंबेडकर ,संपूर्ण वाग्मय खंड 8 पृष्ट 126-127
दोस्तों ! हमारे प्राचीन ग्रंथो में बलि हत्या सूरा पान का खुलकर वर्णन है . यही नहीं की किस जानवर की बलि से कितना अनुग्रह प्राप्त होता है बल्कि उस जानवर को किस तरह बलि दी जाय इसका भी वर्णन किया गया है -
बलि के लिए चंद्रहास सर्वोतम हथियार है,छुरे का दूसरा स्थान है जबकि कुदाली सबसे खराब साधन है.
जब ब्राह्मणों ने मांस-मदिरा का सेवन आरम्भ कर दिया तो उन्हें पुरानो में पशुबली की वकालत करने में कोइ संकोच नहीं हुआ. एक पुराण का विशेष उल्लेख करना आवश्यक है.वह है काली पुराण.यह पुराण स्पष्ट रूप से देवी काली की पूजा को प्रचारित करने के लिए लिखा गया था .इस पुराण में एक अध्याय का नाम ही 'रुधिर अध्याय ' है।
इस अध्याय में शिव ने तीन पुत्रो बेताल,भैरव और भैरो को निम्न प्रकार से संवोधित किया है -
'मेरे पुत्रो !देवताओ का अनुग्रह प्राप्त करने के लिए सम्पादित होने वाले सस्कार और नियमो के विषय में, बताता हू -
1-देवी ,मछली और कच्छप के चढाने से एक माह की अवधि के लिए खुश रहती है और मगरमच्छ से तीन, तक वन्य जन्तुओ की नौ प्रजातियों से देवी नौ महीने प्रसन्न रहती है ..........गौर,नीलगाय के रक्त से एक वर्ष और मृग तथा जंगली सूअर से बारह वर्ष तक संतुष्ट रहती है ........
मृग और दरियाई घोड़े के मांस से देवी पाच सौ वर्ष तक और रोहू मछली तथा बारहसिंघे से देवी तीन सौ वर्षो तक
संतुष्ट रहती है .
डॉक्टर आंबेडकर ,संपूर्ण वाग्मय खंड 8 पृष्ट 126-127
दोस्तों ! हमारे प्राचीन ग्रंथो में बलि हत्या सूरा पान का खुलकर वर्णन है . यही नहीं की किस जानवर की बलि से कितना अनुग्रह प्राप्त होता है बल्कि उस जानवर को किस तरह बलि दी जाय इसका भी वर्णन किया गया है -
बलि के लिए चंद्रहास सर्वोतम हथियार है,छुरे का दूसरा स्थान है जबकि कुदाली सबसे खराब साधन है.
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