लिख
लिख
हमेशा लिख
और लिख ......
चाहे लिखना हो भारी कठिन
सोच कर
विचार कर
मत बैठ, लिख ...........
तेरे अन्दर है आग
उसे सुलगा
मत बुझा
ग़र न बन सके सैलाब
तो भी बह........
तिनका ही सही
उसे ही बहा .......
मत छोड़ हौसला
लड़ जा,भिड जा
मत चूक ,मत भूल
तू आग है,
तूफ़ान है,
तोप है, तलवार है .
तू कवि है ,
लेखक है,
अब तो समझ !
लिख
हमेशा लिख
और लिख ......
चाहे लिखना हो भारी कठिन
सोच कर
विचार कर
मत बैठ, लिख ...........
तेरे अन्दर है आग
उसे सुलगा
मत बुझा
ग़र न बन सके सैलाब
तो भी बह........
तिनका ही सही
उसे ही बहा .......
मत छोड़ हौसला
लड़ जा,भिड जा
मत चूक ,मत भूल
तू आग है,
तूफ़ान है,
तोप है, तलवार है .
तू कवि है ,
लेखक है,
अब तो समझ !
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