बुधवार, 18 अगस्त 2021

Gorakhnath and the kanphata yogis by George Weston Briggs

 पुस्तक समीक्षा -----


इंडोलॉजी को विकसित करने में पश्चिमी विद्वानों का बड़ा हाथ है ऐसे ही एक विद्वान थे जियोर्ज वेस्टन ब्रिग्स।  ब्रिग्स ने भारत के मशहूर कल्ट नाथपंथियों पर पिछली शताब्दी में एक किताब लिखी थी। "गोरखनाथ एवं कनफटा जोगी"।  

कानफटे जोगी या गोरखनाथ उत्तर भारत के बड़े इलाके में फैले हुए हैं। गोरखपुर इनका सबसे बड़ा केंद्र है।इस कल्ट की शुरुआत गुरु गोरखनाथ ने की थी। गोरखनाथ कब हुए ?इस विषय में अनेक मत हैं। लेकिन इस बात की अनेक उद्धरणों से पुष्टि होती है कि गोरखनाथ ,पंजाब इलाके से थे। नाथपंथियों के लिए सबसे पवित्र स्थान सिंध में स्थित हिंगलाज है। हिंगलाज पाकिस्तान में है और एक शक्ति पीठ है।   नाथपंथियों के कान बड़े छेद करने के कारण फट जाते थे इसलिए उनके लिए कुछ लोगो ने कनफटा शब्द प्रयोग किया जाता है।ये कनफटे जोगीयो में बड़े जोगी  अपने कान में गैंडे की सींग के कुंडल पहनते थे। सिख गुरु गोविन्द सिंह जी भी अपने कान में गैंडे के सींग के बने कुण्डल पहनते थे। , ये जोगी घूमते रहते थे। बनारस में एक अंग्रेज अध्येता को 1792 में  एक ऐसा जोगी मिला जो तिब्बत , ,ईरान ,अजरबैजान ,आर्मेनिया  ,आर्मेनिया ,ईराक घूम चुका था ,उसने सेंट्रल एशिया के कुछ शहरो का ऐसा सजीव वर्णन किया जिससे पता चलता है वह अवश्य ही वहां गया होगा और  अन्तत बनारस में स्थापित हो गया। जोगी उत्तर भारत की  एक बिरादरी है। मुसलमान जोगी भी हैं। ये जोगी गृहस्थ भी होते थे। और काम धंधा भी करते थे। इनमे से कुछ ही ऐसे थे जो पूर्णत तपस्या करते थे।  लेखक ने लिखा है कि गढ़वाल के ठंडे  इलाको में भी  ऐसे जोगी घोर ठंड में सिर्फ राख लपेट कर रह लेते हैं।  पुस्तक का बड़ा भाग गोरखनाथ के मिथक के पक्षों के बारे में है। कहा जाता है कि गोरखनाथ वज्रयानी सम्प्रदाय के बौद्ध थे उन्हें शाक्त सम्प्रदाय में गुरु मत्स्येन्द्र नाथ लाये।  नेपाल में मत्स्येन्द्रनाथ सबसे पवित्र विभूति हैं। किवंदती है कि मत्स्येन्द्रनाथ नेपाल के मुस्तांग जिले  के मुक्तिनाथ नामक स्थान पर रहते थे। मुक्तिनाथ एक मात्र ऐसा स्थान माना जाता है जहाँ पंचतत्व एकसाथ  विद्यमान हैं. एक मिथक है कि मत्स्येन्द्रनाथ एक रानी के प्यार में पड़ गए और उसके दिन रात मैथुन में वयस्त रहने लगे ,जब गोरखनाथ को पता चला कि उनके गुरु इस स्थिति में हैं तो वो महल में पहुंचे और पुकारा "जाग मछँदर ,गोरख आया।  तब मत्स्येन्द्रनाथ रानी से उत्पन्न अपने २ पुत्रो नेमिनाथ एवं पार्श्वनाथ के साथ वहां से आ गए [ मेरा मानना है कि यह कहानी कुछ लोगो ने जैन मत पर सनातनी  श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए बनाई है ]पुस्तक के अगले भाग में नाथपंथियों की यौगिक क्रियाओ का वर्णन है।  ब्रिग्स का नाथपंथ की इतनी स्टडी करने का मतलब यह भी हो सकता है कि ब्रिग्स ईसाई मिशनरी के लिए काम करता हो।  क्योंकि ब्रिग्स ने "द चमार्स " में up की चमार बिरादरी के बारे में स्टडी करने के बाद लिखा कि अगर मिशनरी इन पर ध्यान दे तो ईसाई जनसंख्या जल्दी बढ़ेगी,क्योंकि संख्या के लिहाज से ये बहुत जयादा हैं। जोशुआ प्रोजेक्ट जैसी वेबसाइट जिस पर विश्व के छोटे से छोटे समुदाय का वर्णन है इसी बात की और इंगित करती हैं कि कुछ कोलोनियल इंडोलॉजिस्ट्स का बड़ा मकसद ईसाई मिशनरी का मार्ग प्रशस्त करना रहा होगा।  किताब में अनेक महत्वपूर्ण पक्षों की अवहेलना की गयी है यथा गोरख पीठ का नेपाल से सम्बन्ध। एवं गोरखा राज्य से गोरखनाथ से समबन्ध।  यह भी लिखा है कि जब कोई नया वयक्ति गोरख पीठ में जोगी बनने आता था तो उसे  पुलिस थाने में भिजवा कर सत्यापित करवाया जाता था कि कहीं वो अपराधी तो नहीं।  

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