रविवार, 3 अक्टूबर 2021

गांधी का जंतर

 गांधी का जंतर ----


तुम्हें एक जंतर देता हूँ । जब भी तुम्हें संदेह हो या तुम्हारा अहं तुमपर हावी होने लगे, तो यह कसौटी आज़माओ :


"जो सबसे गरीब और कमज़ोर आदमी तुमने देखा हो उसकी शक्ल याद करो और अपने दिल से पूछो कि जो कदम तुंम उठाने का विचार कर रहे हो, वह उस आदमी के लिए कितना उपयोगी होगा , क्या उससे उसे कुछ लाभ पहुँचेगा ?  क्या उससे वह अपने ही जीवन और भाग्य पर कुछ काबू रख सकेगा ?  यानी क्या उससे उन करोड़ों लोगों को स्वराज मिल सकेगा,  जिनके पेट भूखें हैं  और आत्मा अतृप्त है ?


तब तुम देखोगे कि तुम्हारा संदेह मिट रहा है और अहं समाप्त होता जा रहा है।"


                               मोहनदास करम चंद गांधी


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