प्रसिद्ध सोवियत लेखक G.Bongard और A. Vigasin ने अपनी क़िताब The image of india, A study of Ancient Civilizations in the USSR में लिखते हैं--१२ वीं सदी में रूस में 'बर्लाम और जोआसफ़ की कथा' बहुत लोकप्रिय थी। सुविदित है कि यह कहानी बुद्ध की जीवनी का रूपांतरण है और जोआसफ़ नाम भारतीय शब्द बोधिसत्व से (बुदास्फ रूप के माध्यम से) बना है। ईसवी संवत के आरम्भ में बोधिसत्व की कथा मध्य एशिया में काफी लोकप्रिय थी।
वे आगे लिखते हैं, " ससानिद वंश के विख्यात राजा नौशेरवां ने बोधिसत्व की कथा को पहलवी भाषा मे अनुवाद कराया था।
कालांतर में पहलवी भाषा मे लिखा गया बर्लाम और जोआसफ़ कि कथा का रूपांतरण कहीं खो गया परंतु इसका अरबी रूपांतरण उपलब्ध है, जो 8 वीं सदी में हुआ था। कालांतर में रूस में जोआसफ़ के बारे में एक सर्वाधिक लोकप्रिय भजन रचा गया। जिसमें बताया गया कि कैसे भारतीय राजा "अवेनीर" के पुत्र ने अंधा, कोढ़ी दंतहीन बूढ़ा देखा और लोगो का दुःख देखकर रोने लगा और स्वयं भिक्षुक बन गया।
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