बदायूँ (बुद्धमऊ) का नामकरण और इतिहास-
बदायूं (उ. प्र.) का नाम भगवान बुद्ध के नाम पर पड़ा था। मझिआंव गांव भी है।
सूर्यकुण्ड ग्राम-मझिआंव जनपद-बदायूँ इस स्थान को प्रथम बार चीनी यात्री "फाहियान" ने सन 415 ई. में भारत यात्रा के दौरान खोजा था। इस स्थान पर शाक्य मुनि भगवान बुद्ध ने वर्षा वास किया था। पीपल पेड़ के नीचे बैठकर बौद्ध भिक्षुओं एवं उपासकों को धम्मदेशना दी थी।
सम्राट अशोक के समय इस धरती पर बौद्ध विहार बनवाए थे। बदायूँ (बुद्धमऊ) के राजा महिपाल ने भव्य सूर्यकुण्ड बनवाया था। जिसके चारो ओर चौरासी बौद्ध मठ वनवाये थे।
प्रो. गोटी जॉन के अनुसार, एक प्राचीन शिलालेख में इस शहर का नाम 'बेदामूथ' रखा गया और यह क्षेत्र पांचाल जनपद का हिस्सा था।
मुस्लिम इतिहासकार रोज खान लोधी ने कहा कि यहां सम्राट अशोक ने एक बौद्ध विहार और एक किला बनवाया और इसका नाम 'बुद्धमऊ' रखा था।
स्मिथ महोदय के अनुसार, बदायूँ का नाम बुद्ध के नाम पर पड़ा था।
लखनपुर शिलालेख में बदायूँ का नाम 'बौदा म्यूता' मिलता है।।
बुद्धमऊ शब्द बदायूं हो गया आगे सूफी प्रभाव के कारण बदायूं शरीफ़ कहा जाने लगा था।
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