बर्बरता की ढाल ठाकरे
बाल ठाकरे ! बाल ठाकरे !
कैसे फासिस्टी प्रभुओ की -
गला रहा है दाल ठाकरे !
अबे संभल जा,वो आ पंहुचा बाल ठाकरे !
सबने हां की , कौन ना करे !
छिप जा ,मत तू उधर ताक रे !
शिव -सेना की वर्दी डाटे जमा रहा लए -ताल ठाकरे !
सभी डर गए ,बजा रहा है गाल ठाकरे !
अपने भक्तो को कर देगा अब तो मालामाल ठाकरे !
ज रही सहाद्री -घाटिया ,मचा रहा भूचाल ठाकरे !
मन ही मन कहते राजा जी ,जिये भला सौ साल ठाकरे !
चुप है कवि ,डरता है शायद ,खींच नहीं ले खाल ठाकरे !
कौन नहीं फसता है , देखे ,बिछा चुका है जाल ठाकरे !
बाल ठाकरे !बाल ठाकरे !बाल ठाकरे !बाल ठाकरे !
बर्बरता के ढाल ठाकरे !
प्रजातंत्र के काल ठाकरे !
धन -पिशाच के इंगित पाकर ऊँचा करता भाल ठाकरे !
ला पूछने मुसोलिनी से अपने दिल का हाल ठाकरे !
बाल ठाकरे ! बाल ठाकरे ! बाल ठाकरे ! बाल ठाकरे !!!!
नागार्जुन
(यह कविता 'जनयुग' में 1970 में प्रकाशित हुआ था।यह आज भी कितना प्राशंगिक है .यू ही कोई महान कवि नहीं होता )
बाल ठाकरे ! बाल ठाकरे !
कैसे फासिस्टी प्रभुओ की -
गला रहा है दाल ठाकरे !
अबे संभल जा,वो आ पंहुचा बाल ठाकरे !
सबने हां की , कौन ना करे !
छिप जा ,मत तू उधर ताक रे !
शिव -सेना की वर्दी डाटे जमा रहा लए -ताल ठाकरे !
सभी डर गए ,बजा रहा है गाल ठाकरे !
अपने भक्तो को कर देगा अब तो मालामाल ठाकरे !
ज रही सहाद्री -घाटिया ,मचा रहा भूचाल ठाकरे !
मन ही मन कहते राजा जी ,जिये भला सौ साल ठाकरे !
चुप है कवि ,डरता है शायद ,खींच नहीं ले खाल ठाकरे !
कौन नहीं फसता है , देखे ,बिछा चुका है जाल ठाकरे !
बाल ठाकरे !बाल ठाकरे !बाल ठाकरे !बाल ठाकरे !
बर्बरता के ढाल ठाकरे !
प्रजातंत्र के काल ठाकरे !
धन -पिशाच के इंगित पाकर ऊँचा करता भाल ठाकरे !
ला पूछने मुसोलिनी से अपने दिल का हाल ठाकरे !
बाल ठाकरे ! बाल ठाकरे ! बाल ठाकरे ! बाल ठाकरे !!!!
नागार्जुन
(यह कविता 'जनयुग' में 1970 में प्रकाशित हुआ था।यह आज भी कितना प्राशंगिक है .यू ही कोई महान कवि नहीं होता )
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें