सोमवार, 17 दिसंबर 2012

chhtisgarh yatra


ये है इस घर के मुखिया प्लास्टिक का धागा बनाते हुए।जब मैंने इनसे पूछा की क्या आप लोग सन(सनई )नहीं बोते  इन्होने कहा कि आज-कल के बच्चे इन्हे नहीं बोना चाहते क्योकि इसमे मेहनत ज्यादा लगता है।
विकास की मार आदिवासी क्षेत्रो में भी है।कुछ वर्ष पहले जो नदी-तालाब स्वच्छ दीखते थे अब गंदगी से भरे पड़े है।

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