रविवार, 31 मई 2020

छिछले प्रश्न गहरे उत्तर ----------------------------------

कौन जात हो भाई?
"दलित हैं साब!"
नहीं मतलब किसमें आते हो?
आपकी गाली में आते हैं
गन्दी नाली में आते हैं और अलग की हुई थाली में आते हैं साब! मुझे लगा हिन्दू में आते हो!
आता हूँ न साब! पर आपके चुनाव में।

क्या खाते हो भाई?
"जो एक दलित खाता है साब!"
नहीं मतलब क्या क्या खाते हो?
आपसे मार खाता हूँ
कर्ज़ का भार खाता हूँ
और तंगी में नून तो कभी अचार खाता हूँ साब!
नहीं मुझे लगा कि मुर्गा खाते हो!
खाता हूँ न साब! पर आपके चुनाव में।

क्या पीते हो भाई?
"जो एक दलित पीता है साब!
नहीं मतलब क्या क्या पीते हो?
छुआ-छूत का गम
टूटे अरमानों का दम और नंगी आँखों से देखा गया सारा भरम साब!
मुझे लगा शराब पीते हो!
पीता हूँ न साब! पर आपके चुनाव में।


क्या मिला है भाई?
"जो दलितों को मिलता है साब!
नहीं मतलब क्या क्या मिला है?
ज़िल्लत भरी जिंदगी
आपकी छोड़ी हुई गंदगी
और तिस पर भी आप जैसे परजीवियों की बंदगी साब!
मुझे लगा वादे मिले हैं!
मिलते हैं न साब! पर आपके चुनाव में।

क्या किया है भाई?
"जो दलित करता है साब!
नहीं मतलब क्या क्या किया है?
सौ दिन तालाब में काम किया
पसीने से तर सुबह को शाम किया और
आते-जाते ठाकुरों को सलाम किया साब!
मुझे लगा कोई बड़ा काम किया! किया है न साब!
आपके चुनाव का प्रचार..।

बच्चा लाल 'उन्मेष'

शुक्रवार, 29 मई 2020

क्या बौद्ध धर्म हिन्दू धर्म के बाद जन्मा है? ======================== संस्कृत व्याकरण के विद्वान् पतंजली 150 BCE में अपने ग्रन्थ महाभाष्य में लिखते हैं: “आर्यों की भूमि कौनसी है? यह सरस्वती नदी से पूर्व में है. कालक वन के पश्चिम हिमालय के दक्षिण और परियत्र पर्वत के उत्तर में” इसका सीधा अर्थ है कि पतंजली के समय में आर्यावर्त (आर्यभूमि) की एक पूर्वी सीमा थी जिसके परे कोई अन्य सभ्यता या धर्म था. पतंजली के चार शताब्दी बाद मानव धर्म शास्त्र में मनु लिखते हैं “हिमालय और विन्ध्य के बीच प्रयाग पूर्वी समुद्र से पश्चिमी समुद्र के बीच आर्यावर्त भूमि है” इसका अर्थ हुआ कि चार शताब्दी बाद पतंजली के लिए जो प्रदेश पूर्व में था वह मनु के लिए मध्यदेश बन जाता है. अर्थात यह क्षेत्र आर्यों द्वारा जीत लिया जाता है. आर्यभूमि के प्रसार के लिए रास्ता अग्नि और यग्य द्वारा बनाया गया इसका अर्थ हुआ ये लोग जंगल जलाते हुए और युद्ध करते हुए आगे बढ़े. मतलब साफ़ है, मनु तक आते आते वह पूर्वी प्रदेश जो आर्यों का नहीं बल्कि असुरों का था वह आर्यों द्वारा जीत लिया जाता है. पतंजली वर्णित कालक वन मनु द्वारा वर्णित प्रयाग या वर्तमान इलाहाबाद के निकट है.पतंजली महाभाष्य के ही समान बाद के बौधायन धर्म सूत्र (१.२.९) और वशिष्ठ धर्म सूत्र (१.८-१२) कहते हैं कि गंगा और यमुना के बीच का क्षेत्र आर्यावर्त है. अन्य स्त्रोत से शतपथ ब्राह्मण (१३.८.१.५) कहता है कि पूर्व (बिहार की ओर) असुर जन रहते हैं (असुरायः प्राच्यः), ये लोग बड़े बड़े गोल आकार के धर्मस्थल बनाते हैं. बाद में महाभारत में उल्लेख है कि इश्वर और वेद को न मानने वाले और गोल गुंबद बनाने वाले असुर अभी भी बने हुए हैं. इसका अर्थ हुआ कि ब्राह्मणों या आर्यों का और उनके धर्म का प्रसार पश्चिम से पूर्व की तरफ हुआ है. शतपथ ब्राह्मण की मानें तो पूर्व की तरफ असुर रहते थे जो सर घुटाये घूमते हैं और गोल गुंबद की तरह धर्मस्थल बनाते थे. ये गुम्बद असल में बौद्ध स्तूप हैं. ऐसी ही रचनाएं जैनों और आजीवकों की भी होती थीं. ये बौद्ध और जैन अहिंसक थे, युद्ध की भाषा में दक्ष नहीं थे. बाद में महाभारत काल तक असुर शूद्र बन चुके थें अर्थात आर्यों के गुलाम हो चुके थे और उनका बौद्ध धर्म क्षीण हो चुका था. अब गहराई से सोचिये, बौद्ध धर्म ब्राह्मण या आर्य आगमन से पहले भी अपने पूर्ण विक्सित रूप में था. इसका मतलब हुआ कि बौद्ध धर्म ब्राह्मण धर्म से न केवल पुराना है बल्कि पूरा ब्राह्मण धर्म बौद्ध धर्म के खिलाफ एक प्रतिक्रान्ति की तरह बुना गया है. यहाँ अंबेडकर एकदम सही साबित होते हैं. 

गुरुवार, 28 मई 2020

आज़मगढ़ शहर के चौक के पास एक स्थल है उसका नाम "बड़ा देव" है. जो अब एक हिन्दू मंदिर में तब्दील हो चुका है. कुछ वर्ष पहले तक एक पीपल के पेड़ के नीचे डीह बाबा की तरह कुछ हाथी और घोड़े की मृण्मूर्ति थी. अब नही होगा, पक्का !! शब्द की उत्तपत्ति को आप गौर से देखे तो पाएंगे कि यह "बुद्ध देव" का तद्भव "बूढ़ा देव" से और अंत मे "बड़ा देव" बना है। आप को मानने में परेशानी तो होगी लेकिन सोचिएगा....
लघु कथा-- मास्टर सुमेरन को आज कोर्ट में हाज़िर होना है . उन्होंने सरकार की सख़्त भाषा मे आलोचना की है. उनके ऊपर राजद्रोह एवं विभागीय प्रोटोकाल और नियमों के विपरीत लिखने का आरोप है. मास्टर सुमेरन कोर्ट के विटनेस बॉक्स में खड़े है. न्यायधीश पूछता है--"मास्टर सुमेरन आप पर राजद्रोह और अपने विभागीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा है. आप कुछ कहना चाहेंगे ? मास्टर सुमेरन कुछ क्षण चुप रहे फिर बोले, " मी लार्ड ! मैं एक नागरिक होने का फर्ज अदा कर रहा हूँ . मैं सरकार का नौकर होने से पहले एक नागरिक हूँ. इसलिए आलोचना करना मेरा अधिकार है. जब मैं वोट देकर किसी को प्रधानमंत्री बना सकता हूँ तो उसकी आलोचना करने का भी मेरा अधिकार है. और आप बताइए सरकार की आलोचना करना कबसे राजद्रोह हो गया ?" ये सब मुझे न समझाइए. आप कोर्ट में पूछे गए सवाल का जवाब दीजिए. आपके ऊपर सरकार को बदनाम करने और विद्रोह करने का आरोप है. जज ने तल्खी से कहा. सुमेरन को जवाब देना ही था. वे बोले, " मी लार्ड ! लाखों मजदूर, बच्चे, बुजुर्ग आदमी-औरत सड़को पर मर रहे हैं. और इस सरकार ने मुँह-कान बन्द कर रखा है. फिर तैस में आकर कहने लगे. "इन मजदूरों के साथ जो हो रहा उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की है. वो सब अपराधी है जो कुर्सी पर बैठे है. चाहे वह प्रधानमंत्री हो या गांव का प्रधान......" जज ने कहा-"कुर्सी पर तो मैं भी बैठा हूँ" सुमेरन जज की आंखों में आंखे डाल कर बोले,- "आप भी जिम्मेदार है मी लार्ड....."
आइए जानते हैं-- गद्दार दूधनाथ तिवारी को ----------------------------------------------------- अभी अभी 1857 के विद्रोह की आग बुझी भी नही थी कि भारत के सुदूर अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के पोर्ट ब्लेयर द्वीप पर आदिवासियों ने अंग्रेजों के सैनिक अड्डे रॉस आइलैंड पर हमला कर दिया. यह विद्रोह अंडमानी ट्राइब्स (aboriginies) ने अपने 5000 साथियों के साथ तीर-धनुष और भालों से अंग्रेजों की कॉलोनी रॉस आइलैंड पर किया था। लेकिन ये वीर अंडमानी ज्यादातर मारे गए, कुछ ग़ुलाम बनाए गए. अंडमानी हारे नही होते यदि वे दूधनाथ तिवारी को अपने कबीले में इज्ज़त-बेटी न दिया होता और अपने कबीले के राज को अपना हमदर्द समझकर बताया नही होता. दूधनाथ तिवारी बिहार का एक ब्राह्मण था उसने 1857 के सिपाही विद्रोह में भाग लिया था। वो नेटिव इन्फेंट्री 14 वें रेजिमेंट का साधारण सिपाही था. विद्रोह के बाद उसके ऊपर राजद्रोह और हत्या का आरोप लगाया गया और 8 अप्रैल 1858 को अंडमान के रॉस आइलैंड पर सजा काटने के लिए भेज दिया गया. लेकिन कुछ दिन बाद ही वो अपने अन्य 90 साथियों के साथ रॉस आइलैंड से भाग गया. वो भागकर जंगल मे गया उसके सभी 90 दोस्त जंगल मे ही भटक गए. उसमें कुछ भूख- प्यास और थक कर मर गए कुछ आदिवासियों द्वारा मारे गए. लेकिन दूधनाथ की तकदीर अच्छी थी. उसको आदिवासियों ने पकड़ लिया और अपने कबीले में ले गए. दूधनाथ तिवारी चालाक और शातिर था . वो आदिवासियों के बीच अच्छे तरीके से रहने लगा वो उनके साथ दोस्ताना व्यवहार करता. उसकी अच्छाईयों को देखते हुए कबीले के मुखिया हीरा ने अपनी दो पुत्रियों लीपा (20 वर्ष) और जिगाह (16 वर्ष) के साथ उसका विवाह कर दिया.आदिवासियों ने उसे अपना मान लिया और अपने कबीले के सभी राज बता दिए. अंग्रेजो का अंडमान द्वीपसमूह पर आक्रमण करके कब्जा करना वहां के आदिवासियों को अच्छा नही लगा. वे समझते थे कि ये लोग हमारे रीतिरिवाज और उनकी आदिवासियत संस्कृति के लिए खतरा बन सकते हैं. अंदर ही अंदर विद्रोह की आग सुलग रही थी. Aboriginies कबीले में करीब 6000 की संख्या थी जिसमे से 5000 मर्द-औरतों ने रॉस आइलैंड पर आक्रमण करने की योजना बनाई. JP Walker एक अंग्रेज अधिकारी था और 1857 के विद्रोह के समय आगरा में एक अधिकारी के तौर पर नियुक्त था. जिसको विद्रोह के बाद प्रमोशन देकर रॉस आइलैंड अंडमान का सुपरिंटेंडेंट बना दिया गया था . दूधनाथ तिवारी मुखबिर बन गया और उसने अपने ही आश्रयदाताओं के ख़िलाफ गद्दारी की. ज्यादातर अण्डमानी आदिवासी मारें गए कुछ को पकड़कर जेल में डाल दिया गया कुछ को फांसी दे दी गई. इस विद्रोह को बुरी तरह कुचल दिया गया और अंग्रेजों के खिलाफ कोई भी सिर उठाने के काबिल न बचा. यदि दूधनाथ तिवारी ने गद्दारी न किया होता तो भारत का सुदूर इलाका स्वन्त्रता की पहली अलख जगाता. आज भी किसी अण्डमानी के सामने दूधनाथ तिवारी का नाम ले लीजिए वो बहुत ही घृणित प्रतिक्रिया देगा.

फोर्ट विलियम कॉलेज

फोर्ट विलियम कॉलेज  ****** यह बड़ी मजेदार बात है कि सन् 1783 जॉन बी.गिलक्राइस्ट ईस्ट इंडिया कम्पनी में एक सहायक सर्जन के तौर पर नियुक्त ...