किसकी थी सिंधु घाटी की सभ्यता ? आपको इसे जानने के लिए दूर नहीं जाना है ।
आप मोहनजोदड़ो से प्राप्त प्रतिनिधि -पुरुष के नाक - नक्शे को गौर से देखिए ।
मूर्ति का मस्तक छोटा तथा पीछे की ओर ढलुआ है । गर्दन कुछ अधिक मोटी है तथा मुँह की गोलाई बड़ी है । होंठ मोटे हैं । नाक चौड़ी और कुछ ऊपर की ओर उभरी हुई है ।
जबकि नृविज्ञानियों ने बताया है कि आर्यों का मस्तक उभरा हुआ लंबा , गर्दन सुराहीनुमा तथा होंठ पतले एवं नाक नुकीली और तीखी होती है ।
नाक - नक्शे का यह विरोधाभास साबित करता है कि सिंधु घाटी की सभ्यता आर्यों की नहीं थी ।
राजेन्द्र प्रसाद सिंह

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